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Saturday, 11 February 2012

बोलो..बोलो क्यों चुप हो

यथोक्ति कुशाग्र बुद्धि वर्दीधारी 
व्यस्त मंत्रणा में
अधीनस्थ मशगूल 
यंत्रणा देने में
कुछ सम्भाबित आततायिओं को
त्रासदी, नित नयी त्रासदी
त्रासदी के अनंतर त्रासदी
गूढ़ समस्याओं के समाधान
दफ्तर में चाय की चुस्कियों में
नित्य-प्रति मोती होती फाइलें
कितनी समीचीन राम जाने
आतंकवाद में परिपक्व
दिग्भ्रमित सिरफिरे
जो कुकुरमुत्तो से उग आते हैं
कहीं भी, कभी भी अचानक
बस गूंजती है गोलियों की धायं -धायं
रिसता है लहू, दम तोडती है मानवता.....
आवाज सबने सुनी, खून सबने देखा
फिर भी झिर्रियों से झांकती हैं सिर्फ आँखें
चौपालों के देश में......
फिर....
फिर नेताओं के मर्मस्पर्शी बयान
मंच पर समस्याओं के समाधान
किन्तु शेष सवालिया निशान
हत्यारा कैसे हो गया तिरोधान
क्या  जमी निगल गयी ?
क्या आसमाँ खा गया?
बोलो..बोलो क्यों चुप हो 



कॉलेज जीवन की एक रचना 




डॉ आशुतोष मिश्र
निदेशक 
आचार्य नरेन्द्र देव कॉलेज ऑफ़ फार्मेसी
बभनान, गोंडा, उत्तरप्रदेश
मोबाइल न० 9839167801







13 comments:

  1. समसामयिक प्रश्न उठाती बहुत सुंदर अभिव्यक्ति...

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  2. नेताओं के मर्मस्पर्शी बयान
    मंच पर समस्याओं के समाधान
    किन्तु शेष सवालिया निशान
    हत्यारा कैसे हो गया तिरोधान
    क्या जमी निगल गयी ?
    क्या आसमाँ खा गया?
    बोलो..बोलो क्यों चुप हो ... uttar hai , per daba ghuta

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  3. नहीं है इतना आसान
    मिलना इस प्रश्न का समाधान
    जब किस्मत का करे फैसला शैतान
    तो क्या करे इंसान

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  4. सार्थक प्रस्तुति !..

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  5. फिर नेताओं के मर्मस्पर्शी बयान
    मंच पर समस्याओं के समाधान
    किन्तु शेष सवालिया निशान
    हत्यारा कैसे हो गया तिरोधान

    ओजपूर्ण और स्थिति को बेहतर तरीके से अभिव्यक्त करती रचना ......!

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  6. kis pankti ko chod de ....sabhi panktiya kabil a tarif

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  7. त्रासदी के अनंतर त्रासदी ही हमारे समय की विडम्बना है। समेकित प्रयास से ही समाधान संभव।

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  8. वाह बहुत खूब ...कविता में शब्दों की जादूगिरी नज़र आई

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  9. बहुत खूब लिखा है आज के सन्दर्भ में |
    आशा

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  10. उम्दा..प्रभावी रचना..

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  11. बेहतरीन भाव पूर्ण सार्थक रचना,

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  12. बहुत ही झकझोरने वाली है आपकी यह प्रस्तुति.
    अकाट्य प्रश्न करती हुई,तंत्र पर प्रहार करती.

    सार्थक विचारोत्तेजक प्रस्तुति के लिए आभार.

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