यथोक्ति कुशाग्र बुद्धि वर्दीधारी
व्यस्त मंत्रणा में
अधीनस्थ मशगूल
यंत्रणा देने में
कुछ सम्भाबित आततायिओं को
त्रासदी, नित नयी त्रासदी
त्रासदी के अनंतर त्रासदी
गूढ़ समस्याओं के समाधान
दफ्तर में चाय की चुस्कियों में
नित्य-प्रति मोती होती फाइलें
कितनी समीचीन राम जाने
आतंकवाद में परिपक्व
दिग्भ्रमित सिरफिरे
जो कुकुरमुत्तो से उग आते हैं
कहीं भी, कभी भी अचानक
बस गूंजती है गोलियों की धायं -धायं
रिसता है लहू, दम तोडती है मानवता.....
आवाज सबने सुनी, खून सबने देखा
फिर भी झिर्रियों से झांकती हैं सिर्फ आँखें
चौपालों के देश में......
फिर....
फिर नेताओं के मर्मस्पर्शी बयान
मंच पर समस्याओं के समाधान
किन्तु शेष सवालिया निशान
हत्यारा कैसे हो गया तिरोधान
क्या जमी निगल गयी ?
क्या आसमाँ खा गया?
बोलो..बोलो क्यों चुप हो
कॉलेज जीवन की एक रचना
डॉ आशुतोष मिश्र
निदेशक
आचार्य नरेन्द्र देव कॉलेज ऑफ़ फार्मेसी
बभनान, गोंडा, उत्तरप्रदेश
मोबाइल न० 9839167801
समसामयिक प्रश्न उठाती बहुत सुंदर अभिव्यक्ति...
ReplyDeleteनेताओं के मर्मस्पर्शी बयान
ReplyDeleteमंच पर समस्याओं के समाधान
किन्तु शेष सवालिया निशान
हत्यारा कैसे हो गया तिरोधान
क्या जमी निगल गयी ?
क्या आसमाँ खा गया?
बोलो..बोलो क्यों चुप हो ... uttar hai , per daba ghuta
नहीं है इतना आसान
ReplyDeleteमिलना इस प्रश्न का समाधान
जब किस्मत का करे फैसला शैतान
तो क्या करे इंसान
सार्थक प्रस्तुति !..
ReplyDeleteफिर नेताओं के मर्मस्पर्शी बयान
ReplyDeleteमंच पर समस्याओं के समाधान
किन्तु शेष सवालिया निशान
हत्यारा कैसे हो गया तिरोधान
ओजपूर्ण और स्थिति को बेहतर तरीके से अभिव्यक्त करती रचना ......!
kis pankti ko chod de ....sabhi panktiya kabil a tarif
ReplyDeleteBILKUL TEEKHA OJ ....SADAR BADHAI.
ReplyDeleteत्रासदी के अनंतर त्रासदी ही हमारे समय की विडम्बना है। समेकित प्रयास से ही समाधान संभव।
ReplyDeleteवाह बहुत खूब ...कविता में शब्दों की जादूगिरी नज़र आई
ReplyDeleteबहुत खूब लिखा है आज के सन्दर्भ में |
ReplyDeleteआशा
उम्दा..प्रभावी रचना..
ReplyDeleteबेहतरीन भाव पूर्ण सार्थक रचना,
ReplyDeleteबहुत ही झकझोरने वाली है आपकी यह प्रस्तुति.
ReplyDeleteअकाट्य प्रश्न करती हुई,तंत्र पर प्रहार करती.
सार्थक विचारोत्तेजक प्रस्तुति के लिए आभार.