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Friday, 2 March 2012

गीत क्या लिक्खें कोई

गीत क्या लिक्खें  कोई

गीत क्या लिक्खें  कोई जब
मुट्ठी में जकड़े काल के 
भूख का दानव भयंकर रूप धरता जा रहा है
सामने फैलाये मुख सुरसा सी महगाई खड़ी है
क्रोध में तपते रवि की तपन जैसा दौर है
मेघ में गर्जन , चपलता शेष चपला में नहीं 
गीत क्या लिक्खें कोई जब...
घर गए मालिक के लेने
स्वयं लुट कर आ गए
सुदामा के चावलों को संतरी  ही खा गए
नेह के बदले नयन  से टपकता है लहू जब
सिसकते बचपन के सर पर कर नहीं ममता का कोई
गीत क्या लिक्खें कोई 
जब शेष ना अवशेष भी चौपाल के.....
दर्द लिक्खेंगे बढेगा दर्द का अहसाश ही 
कलम से कैसे लिखेंगे झूठ के खुशहाल हैं 
मूल्य की प्रतिमाएं ही खंडित हुई जब
बुनियाद रिश्तों की हुई है तार-तार 
गीत क्या लिक्खें कोई 
जब सूखे कमल दल ताल के
हो गयी तब्दील नालों में नदी
शहर जिंदा लोगों का शमशान हो
ढेर पर बारूद के जब आशियाँ हो
मनुज तपती रेत पर मरते हिरन सा
गीत क्या लिक्खें कोई 
जब रात में हों स्वप्न भी भूचाल के 




डॉ आशुतोष मिश्र
निदेशक
आचार्य नरेन्द्र देव कॉलेज ऑफ़ फार्मेसी
बभनान,गोंडा, उत्तरप्रदेश
मोबाइल न० 9839167801




19 comments:

  1. bahut jabardast bhaav sanjoye hain rachna me har shabd aaj ke samaaj ko aaina dikha raha hai.

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  2. सुंदर अतिसुन्दर रचना , बधाई .......

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  3. जब मन अशांत हो और उसमे बवंडर उठते हो तो कवि मन रचना करे भी तो कैसे???

    बेहद सार्थक लेखन...
    सादर.

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  4. ऐसे माहौल में सच कैसे कोई गीत लिखे .... अच्छी प्रस्तुति

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  5. आपकी इस कविता में निराधार स्वप्नशीलता और हवाई उत्साह न होकर सामाजिक बेचैनियां और सामाजिक वर्चस्वों के प्रति गुस्सा, क्षोभ और असहमति का इज़हार बड़ी सशक्तता के साथ प्रकट होता है।

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  6. बड़ा कठिन हो जाता है तब मन को सहज रख पाना..

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  7. इस जीवन के कुछ कठिन पल

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  8. होली है होलो हुलस, हाजिर हफ्ता-हाट ।
    चर्चित चर्चा-मंच पर, रविकर जोहे बाट ।

    रविवारीय चर्चा-मंच

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  9. बहुत गहरे विचार |
    बढ़िया प्रस्तुति |
    होली पर हार्दिक शुभकामनाएं |
    आशा

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  10. सच कहा है ... ऐसे में गीत नही विप्लव की जरूरत है ...
    गहन विचार ...

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  11. बहुत बढ़िया प्रस्तुति!
    रंगों के त्यौहार होलिकोत्सव की अग्रिम शुभकामनाएँ!

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  12. बहुत सुन्दर सार्थक रचना.
    दिल का आक्रोश व्यक्त व प्रकट करती.

    प्रस्तुति के लिए आभार.

    होली की हार्दिक शुभकामनाएँ.

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  13. बेहतरीन प्रस्तुति .होली मुबारक .

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  14. आक्रोश और बगावत ही भर गया है अब पन्नों और स्याहियों में ...परिवर्तन आवश्यक हो गया है |

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  15. कल 25/05/2012 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  16. ek samayik rachna... vartman halat se upji peeda ka bahut sshakt chitran.. lekhak ko badhai..

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  17. बेहतरीन प्रस्‍तुति।

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