Tuesday, 16 August 2022

AM 38 आसान हो रही है मौत


एक शमशान में
पुरोहित ने मृतक के ज्येष्ठ पुत्र को
बुलाया
जलती चिता के
कपाल पर
कपाल क्रिया का विधान समझाया,
पुत्र ने बैसे ही दुहराया
पिता के साथ पुत्र का ये सलूक
मुझे नहीं भाया
मैंने पंडे से प्रश्न उठाया
उसने मुक्ति के मार्ग में
मोह को बाधक बताया
और समझाया
अपने बेटे के इस कृत्य से
पिता की आत्मा का पुत्र से मोहभंग होगा
तभी मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होगा
उस दिन से
समय के हर पड़ाव को गौर से देखता हूँ
अपनो का बेगाना होना,
रिश्तेदारों के परिवर्तित होता व्यबहार
मित्रों का मुख मोड़ना,
अपनी ही औलाद का विमुख होना,
आंखें तरेरना
सब कुछ
मौत से बहुत पहले ही
संपादित की जा चुकी
कपाल क्रिया का अहसास दिलाते है
जहाँ क्रमबद्ध तरीके से
हर मोह भंग करके
आसान किया जाता है
मौत का रास्ता,
मुक्ति का रास्ता।
डॉ आशुतोष मिश्र
स्वरचित 13082022
आचार्य नरेंद्र देव कॉलेज ऑफ फार्मेसी, बभनानं
गोण्डा उत्तरप्रदेश
Fb blog

1 comment:

  1. मुक्ति का मार्ग ...... लेकिन इसमें तो दुखः भी निहित है ।।

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