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Sunday, 18 March 2012

(BP 58) दिल धडकता है तेरा ,राज छुपकर रखना

मेरी आँखों में जब ख्वाब  सुनहरा होगा
मुझको मालूम तेरे घर पे भी पहरा होगा 


आप शर्मायेंगे छुपकर के कहीं चिलमन में
जब मेरे यार मेरे सर पर भी सेहरा होगा 


मेरे शेरों का बजन उस घडी बढेगा खुद
जब मेरे सामने गुल सा तेरा चेहरा होगा


इश्क-ओ -हुश्न जब भी अंधे होंगे उल्फत में 
ठीक उस वक़्त जमाना भी ये बहरा होगा 


दिल धडकता है तेरा ,राज छुपाकर रखना
वरना ऐ "आशु" जख्म दिल पे भी गहरा होगा 
A2/9

२१२२ ११२२ ११२२ २२ मॉडिफाइड
जब मेरी आँखों में इक ख्वाब सुनहरा होगा 
तब तेरे घर पे भी मालूम है पहरा होगा 
आप शर्मायेंगे छुपकर के कहीं चिलमन में
जिस घड़ी सर पे बंधा मेरे भी सहरा होगा 
शायरी में भी मेरी जान तभी आयेगी
जब मेरे सामने गुल सा तेरा चेहरा होता

इश्क- -हुश्न जब भी अंधे होंगे उल्फत में
ठीक उस वक़्त जमाना भी ये बहरा होगा

दिल धडकता है तेरा राज न खुल जाये कभी


दिल पे गर जख्म हुआ जख्म ये गहरा होगा 


डॉ आशुतोष मिश्र 
आचार्य नरेन्द्र देव कॉलेज ऑफ़ फार्मेसी
बभनान, गोंडा, उत्तरप्रदेश
मोबाइल न० 9839167801 
A2/8
२१२२ ११२२ ११२२ २२ मॉडिफाइड 
जब मेरी आँखों में इक ख्वाब सुनहरा होगा 
तब तेरे घर पे भी मालूम है पहरा होगा  
आप शर्मायेंगे छुपकर के कहीं चिलमन में
जिस घड़ी सर पे बंधा मेरे भी सहरा होगा  
 शायरी में भी मेरी जान तभी आयेगी 
जब मेरे सामने गुल सा तेरा चेहरा होगा
इश्क़ ओ हुश्न जो अंधे हुये हैं उल्फत में 
बेखबर थे की जमाना भी ये बहरा होगा 
ये न सोचा था जमाना भी ये बहरा होगा  
इश्क-ओ -हुश्न जब भी अंधे होंगे उल्फत में
 ठीक उस वक़्त जमाना भी ये बहरा होगा 
दिल धडकता है तेरा राज न खुल जाये कभी 

दिल पे गर जख्म हुआ जख्म ये गहरा होगा

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