Friday, 3 January 2014

(BP11) चर्चा में है ईमान अब भी जाग जाईये

चर्चा में है ईमान अब भी जाग जाईये 
मुश्किल में है सम्मान अब भी जाग जाईये 

जिसको न अभी है पता भूगोल देश का 
नेता है वो नादान अभी जाग जाईये 

बल्ला न छुआ जिसने हो जीवन में ही कभी 
बनना उसे कप्तान अब भी जाग जाईये 

खामोश हवा कर रही थी इंतज़ार ही 
वो बन गयी तूफान अब भी जाग जाईये 

कुर्सी ही जिसको इंसा से प्यारी है दोस्तों 
साजिस रचे शैतान अब भी जाग जाईये 

कश्ती ए वतन डूब ही जाए न दोस्तों 
प्यारी हो गर जो आन अब भी जाग जाईये 

बेटे का क्या है फर्ज वो सबको यहाँ पता 
माँ हो न परेशान अब भी जाग जाईये 

डॉ आशुतोष मिश्रा
आचार्य नरेद्र देव कॉलेज ऑफ़ फार्मेसी
बभनान गोंडा 

7 comments:

  1. बहुत ही बेहतरीन रचना...

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  2. शुभकामनायें आदरणीय-
    खूबसूरत प्रस्तुति-

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  3. कुछ भी हो, अब तो जागना ही होगा।

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  4. आदरणीय राजीव जी धन्यवाद ..नव वर्ष की हार्दिक शुभ्कमाओं के साथ

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  5. बेटे का क्या है फर्ज वो सबको यहाँ पता
    माँ हो न परेशान अब भी जाग जाईये

    वाह ! बहुत ही सुंदर गजल ...!

    RECENT POST -: नये साल का पहला दिन.

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