Saturday, 10 September 2011

(A1/6) मन तो पागल हो जाता है


मन तो पागल हो जाता
जब अलि कलि पे मिल जाता  
रिमझिम रिमझिम रिमझिम रिमझिम
रिमझिम रिमझिम रिमझिम रिमझिम 
सावन जब नगमें गाता
मन तो पागल हो जाता है 
मन तो .........................
कल-कल कल-कल करती तटिनी
झर-झर  झर -झर झरते झरने
योवन के चरमोत्कर्ष पे
जब गुलाब खिल जाता है
मन तो पागल हो जाता है 
मन तो .........................
पनघट पे पानी भरती
अल्वेली अल्हड पनिहारिन
लहर लहर लहराए कमरिया
आँचल नहीं संभाला जाता
मन तो पागल हो जाता है 
मन तो .........................
तपती तेज रवि किरने
मुझको बैचैन नहीं करती
सौम्य शांत शीतल शशांक से
जब तन मन जल जाता है
मन तो पागल हो जाता है 
मन तो .........................
जब तक था हमसफ़र साथ में
रूठे रूठे रहते थे
जुदा हुए दो ही पल में जब
दर्दे दिल बढ़ जाता है
मन तो पागल हो जाता है 
मन तो .........................



डॉ आशुतोष मिश्र
निदेशक
आचार्य नरेन्द्र देव कॉलेज ऑफ़ फार्मेसी 
बभनान, गोंडा, उत्तरप्रदेश
मोबाइल न० 9839167801   

23 comments:

  1. बरसती बूँदें और मन का एकाकीपन, मन पागल हो जाता है।

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  2. जब तक था हमसफ़र साथ में
    रूठे रूठे रहते थे
    जुदा हुए दो ही पल में जब
    दर्दे दिल बढ़ जाता है
    मन तो पागल हो जाता है achhe bhaw

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  3. क्या बात है...पागलमन को पागलपन का एहसास

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  4. आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा दिनांक 12-09-2011 को सोमवासरीय चर्चा मंच पर भी होगी। सूचनार्थ

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  5. चंचल मनवा......
    मन की मति पर मत चलियो रे
    जीते जी मरवा देगा.

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  6. कमाल है,डॉ. साहब कमाल है.
    आप तो गजब ढहा रहें हैं.
    शब्दों के संगीत से भावों की तरंगों
    का ज्वार भाटा ही ला दिया है आपने.

    सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार.

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  7. बहुत ही कोमल भावनाओं में रची-बसी खूबसूरत रचना ....

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  8. man ke komal bhavon ka khoobsoorat chitran.

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  9. कमाल है ||
    बहुत सुन्दर प्रस्तुति ||
    बधाई ||

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  10. सौम्य शांत शीतल शशांक से
    जब तन मन जल जाता है ....

    आनंद आ गया भाई सा. चमत्कृत अलंकृत रचना पढ़कर...
    सादर साधुवाद....

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  11. मिश्र जी, बहुत अच्छी रचना है...

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  12. शायद ऐसा अहसास सभी को कभी न कभी होता है।

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  13. कभी -कभी मन पागल हो जाता है .......सुन्दर अभिव्यक्ति

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  14. सौम्य शांत शीतल शशांक से
    जब तन मन जल जाता है
    मन तो पागल हो जाता है

    खूबसूरती से लिखे एहसास

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  15. सुन्दर शब्द औ भाव चित्र मानसिक कुन्हासे का सजीव चित्रण .

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  16. Aashu jee आपको अग्रिम हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं आज हमारी "मातृ भाषा" का दिन है तो आज हम संकल्प करें की हम हमेशा इसकी मान रखेंगें...
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  17. ध्वन्यात्मकता से परिपूर्ण रचना ने मन को छू लिया.अतिसुन्दर.

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  18. यह रचना ही नहीं साधना है।

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  20. सुन्दर शब्द भाव.

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  21. बहुत सुन्दर प्रस्तुति ||
    हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
    *************************
    जय हिंद जय हिंदी राष्ट्र भाषा

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  22. मेरे ब्लॉग पर आईयेगा,डॉक्टर साहब.
    नई पोस्ट जारी की है.

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