जख्म सैंकड़ों सीने में ले
सजल नयन है
गली-गली में घूम रहा हूँ
दर-दर पे देता हू दस्तक सजल नयन है
रूँधा कंठ है
पथिक थक गया ,
पथ अनंत है
कदम-कदम पे चौराहे हैं
चक्कर खाती ये राहें हैं
बियावान से कितने जंगल
पथ गहरी सरिताओं वाले
पर्वत की ऊँची छोटी है
गहरी खाई, गहरे नाले
ढूंढेंगे हम तुझे जहाँ पे
ऐसा न कोई दिगंत है
पथिक थक गया पथ अनंत है
खुशियाँ कोसों दूर खड़ी हैं
रुग्ण हताश यहाँ जन-जन है
आँख मिचौनी बहुत हो चुकी
आजा आके गले लगा जा
जर्जर तन है
टूटा मन है
तू न लौटी तो, निश्चित ही
मानव का आ गया अंत है
आजा, ढूंढ़ नहीं पाऊंगा
बांध सब्र का टूट रहा है
सांसों की गति मंद-मंद है
पथिक थक गया
पथ अनंत है
डॉ आशुतोष मिश्र
निदेशक
आचार्य नरेन्द्र देव कॉलेज ऑफ़ फार्मेसी
बभनान, गोंडा, उत्तरप्रदेश
मोबाइल न० 9839167801
कॉलेज लाइफ पोएम (1989 -1995)